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तीरथगढ़ वॉटर फॉल्स: रमणीक स्थल     छत्तीसगढ़ का तीरथगढ़ वॉटर फॉल्स देश के शीर्ष फॉल्स में है। सुगंधित वनस्पतियों से घिरा यह वॉटर फॉल्स छत्तीसगढ़ की शान भी माना जाता है।      करीब 60 फुट ऊंचाई से गिरने वाला जल एक खास रोमांच पैदा करता है। जगदलपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर मुनगा-बहार नदी पर यह वॉटर फॉल्स स्थित है।    जगदलपुर से दक्षिण-पश्चिम दिशा में करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित यह वॉटर फॉल्स विशिष्टताओं से भरा है। करीब 168 मीटर चौड़ाई वाला यह फॉल्स एक अति सुन्दर एवं विहंगम दृश्य उत्पन्न करता है। यह एक अति मनोरम एवं रमणीक स्थल है।      फॉल्स का जल नीचे आकर एक जलधारा में परिवर्तित होकर 20 मीटर गहरे कुण्ड में गिरता है। गजब की सुन्दरता वाला तीरथगढ़ वॉटर फॉल्स धार्मिक स्थान की भी मान्यता रखता है। सुगंधित मूल्यवान वनस्पतियां पर्यटकों को एक ताजगी से भर देती हैं।      भगवान शिव एवं पार्वती जी के मंदिर एवं मनोहर दृश्य पर्यटकों-सैलानियों को बरबस आकर्षित करते हैं। इस क्षेत्र में वॉटर फॉल्स की एक लम्बी श्रंखला है। तीरथगढ़...
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चित्रकोट वॉटर फॉल्स: इन्द्रधनुषी छटा       छत्तीसगढ़ के चित्रकोट वॉटर फॉल्स की सुन्दरता का कोई जोड़ नहीं। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला स्थित चित्रकोट वॉटर फॉल्स को देखने एवं जलक्रीड़ा का आनन्द लेने देश-दुनिया के पर्यटक आते हैं।     घोड़े की नाल के आकार का यह वॉटर फॉल्स बस्तर में जगदलपुर से करीब 39 किलोमीटर दूर है। करीब 100 फुट ऊंचाई से गिरने वाले इस वॉटर फॉल्स की छटा इन्द्रधनुषी है।      करीब 100 फुट शीर्ष से नीचे गिरने वाले इस फॉल्स की गर्जना बेहद रोमांचक होती है। छत्तीसगढ़ का यह एक अति सुन्दर पिकनिक स्पॉट है। इसकी चौड़ाई एवं व्यापकता देखते ही बनती है।     इसकी चौड़ाई करीब 300 मीटर है। चित्रकोट वॉटर फॉल्स को देश का नियाग्रा फॉल्स भी कहा जाता है। इस वॉटर फॉल्स का उद्भव इन्द्रावती नदी से है। इन्द्रावती नदी ओडिशा के कालीहांडी से प्रवाहित होकर विंध्य क्षेत्र से होते हुये जगदलपुर से गुजरती है। जुलाई से अक्टूबर की अवधि में इसका सुन्दर नजारा दिखता है।      फोटोग्राफी के लिए यह एक सुन्दर स्थान है। फॉल्स की...
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ककोलत वॉटर फॉल्स: जल का रोमांच      वॉटर फॉल्स की शीतलता एक अलग ही आनन्द प्रदान करती है। वॉटर फॉल्स में स्नान करना हो या फिर जलक्रीड़ा का लुफ्त उठाना हो खास तौर से गर्मियोें में सैर-सपाटा करना चाहिए।     बिहार के नवादा जिला स्थित ककोलत वॉटर फॉल्स को देश के चुनिंदा वॉटर फॉल्स में गिना जाता है। ककोलत वॉटर फॉल्स की सुन्दरता एवं शीतलता पर्यटकों के मन-मस्तिष्क को पुलकित एवं प्रफुल्लित कर देती है।     खूबसूरत पहाड़ी के निकट स्थित ककोलत वॉटर फॉल्स जलक्रीड़ा का एक पसंदीदा क्षेत्र है। करीब 160 फुट ऊंचाई से नीचे गिरता जल निश्चय ही एक रोमांच पैदा करता है।     ककोलत वॉटर फॉल्स पौराणिक संदर्भ से भी ताल्लुक रखता है। पौराणिक कहावत है कि त्रेता युग में एक राजा को ऋषि ने श्राप दिया था। श्राप के कारण राजा अजगर बन गया था। अजगर के रूप में राजा यहीं प्रवास करने लगा।       द्वापर युग में पाण्डव वनवास की अवधि में कुछ समय के लिए यहां आये थे। पाण्डव के आशीर्वाद से राजा को इस यातना से मुक्ति मिली थी। श्राप से मुक्त हो...
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सूचिपारा वॉटर फॉल्स : रोमांचक स्थान       केरल का सूचिपारा वॉटर फॉल्स एक रोमांचक स्थान है। केरल के वायानाड जिला के मेपदादी शहर से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित यह वॉटर फॉल्स पर्यटकों का सर्वाधिक पसंदीदा क्षेत्र है।     इस झरना की खूबसूरती मानसून के मौसम आैर भी अधिक बढ़ जाती है। बारिश की रिमझिम फुहारों के साथ झरना का कल-कल बहना मन को रोमांच से भर देता है।     वनस्पतियों एवं वन क्षेत्र से घिरा यह स्थान पर्यावरण सवंर्धता को प्रदर्शित करता है। आक्सीजन की प्रचुरता पर्यटकों को ऊर्जावान बना देती है। वन क्षेत्र की हरियाली एवं शीतलता रोम-रोम को प्रफुल्लित एवं पुलकित कर देती है। हरा-भरा वन क्षेत्र एवं सूर्य की लालिमा सूचिपारा वॉटर फॉल्स को एक खास सुन्दरता प्रदान करती है।      सूचिपारा वॉटर फॉल्स पर्णपाती, सदाबहार एवं पर्वतीय जंगलों से घिरा है। स्थानीय भाषा में सूचि का आशय सुई होता है। पारा का अर्थ रॉक होता है। सूचिपारा वॉटर फॉल्स एक शीर्ष पहाड़ी से नीचे गिरता है। इस झरना को चलीयार नदी का हिस्सा माना जाता है।   ...
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हाथी वाटर फॉल्स: एक सुखद एहसास      शिलांग का हाथी वाटर फॉल्स एक बेहद शांत एवं शानदार पर्ययन स्थल है। हाथी वाटर फॉल्स को देश के शीर्ष वाटर फॉल्स में गिना जाता है। हाथी वाटर फॉल्स शिलांग के शीर्ष क्षेत्र में स्थित है।    हाथी वाटर फॉल्स की खासियत यह है कि चौतरफा यह वनस्पतियों से घिरा है। वनस्पतियों की प्रचुुरता पर्यटकों को एक सुखद प्राणवायु प्रदान करती है। लिहाजा पर्यटक कुछ ही पलों में यहां आक्सीजन से भरपूर एवं ऊर्जावान महसूस करते हैं।    चौतरफा पर्यावरण संवर्धन का एहसास कराता वन क्षेत्र मन-तन को प्रफुल्लित कर देता है। मेघालय की राजधानी शिलांग से करीब 8 किलोमीटर दूर हाथी वाटर फॉल्स पर्यटकों का पसंदीदा स्थल है। यह एक शानदार पिकनिक स्पॉट भी है।        शिलांग एवं हाथी वाटर फॉल्स के बीच खूबसूरत सड़कों का संजाल थकान महसूस नहीं होने देता। इस वाटर फॉल्स का नजारा भी विहंगम है। स्थानी भाषा में इसे का कशैद लाई पातेंग खोहस्यू कहा जाता है। इसका अर्थ होता है कि तीन चरणों में पानी का गिरना। ब्रिाटिश शासन ने इस वाटर फॉल्...
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दूधसागर वाटर फॉल्स: गजब की सुन्दरता      दूधसागर वाटर फॉल्स को 'सी आफ मिल्क" कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। गोवा का यह वाटर फॉल्स मंडोवी नदी पर स्थित है।    करीब 310 मीटर ऊंचाई से गिरने वाले इस झरना (फॉल्स) को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि फॉल्स में पानी न होकर दूध की धारा प्रवाहित हो। शायद इसी लिए दूधसागर वाटर फॉल्स को सी आफ मिल्क भी कहा जाता है।   इस वाटर फॉल्स की संरचना भी विहंगम है। ऊंचाई से गिरता-उछलता पानी एक खास चमक उत्पन्न करता है। दूधसागर वाटर फॉल्स को सफेद झरना भी कहा जाता है क्योंकि इस झरना का रंग दूधिया है। उछाल मारता झरना का पानी देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे जलक्रीडा हो रही हो।      दूधसागर वाटर फॉल्स वस्तुत: गोवा एवं कर्नाटक सीमा पर स्थित है। देश के पांच शीर्ष वाटर फॉल्स में गिना जाने वाला दूधसागर वाटर फॉल्स 310 मीटर शिखर से नीचे आता है। स्थल पर एहसास होता है कि झरना सीधे आसमान से धरती पर गिर रहा हो। इस भव्य-दिव्य झरना की चौड़ाई भी कम नहीं है। इसकी चौड़ाई 30 मीटर के आसपास है। दूधसागर वाटर फॉल्स...
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बैकवाटर्स : जल पर्यटन का आनन्द     केरल के 'बैकवाटर्स" को भारत के पर्यटन का ह्मदय स्थल कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, जलक्रीड़ा या जलयात्रा का लुफ्त लेना हो तो 'बैकवाटर्स" से बेहतर कहीं कुछ नहीं।    केरल सामान्यत: प्राकृतिक सौन्दर्य एवं प्राकृतिक धरोहर-सम्पदाओं से परिपूरित है। 'बैकवाटर्स" एक ऐसी ही प्राकृतिक सम्पदा है। 'बैकवाटर्स" को अनूप झीलें भी कहा जाता है।   दक्षिण भारत के इस पर्यटन क्षेत्र में सैर-सपाटा, मौज मस्ती के साथ ही खानपान का भी आनन्द लिया जा सकता है। 'बैकवाटर्स" अरब सागर के समानान्तर करीब तीन दर्जन नदियों का संगम क्षेत्र है। केरल की उत्तर-दक्षिण लम्बाई का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन क्षेत्र के तौर पर प्राकृतिक रूप से विकसित एवं संरचित है। वाटर दूर का असली आनन्द पर्यटकों को 'बैकवाटर्स" में ही मिलता है क्योंकि नदियों की जलयात्रा का सिलसिला कभी खत्म होते नहीं दिखता।      'बैकवाटर्स" क्षेत्र में नहरों, झीलों, नदियों एवं समुद्री दायरा असीमित दिखता है। करीब नौ सौ किलोमीटर लम्बा जलमार्ग जलयात्रा क...