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रंध वॉटर फॉल्स : दूधिया सुन्दरता     रंध वॉटर फॉल्स की खूबसूरती का कोई जोड़ नहीं। शांत एवं शीतलता वाला रंध वॉटर फॉल्स देश के चुनिंदा वॉटर फॉल्स में से एक है।     प्रवरा नदी का हिस्सा यह वॉटर फॉल्स वनस्पतियों से घिरा है। लिहाजा यहां पर्यटकों को शुद्ध प्राणवायु मिलती है। महाराष्ट्र के अहमद नगर जिला में स्थित रंध वॉटर फॉल्स करीब 170 फुट ऊंचाई से घाटी में गिरता है। यह वॉटर फॉल्स महाराष्ट्र के खूबसूरत स्थानों में से एक है। खास तौर से बारिश के मौसम में इस वॉटर फॉल्स की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं।      वस्तुत: यह वॉटर फॉल्स जल विद्युत परियोजना का हिस्सा है लेकिन इसकी खूबसूरती ने इसे सुन्दर पर्यटन स्थल बना दिया है। वनस्पतियों से घिरा होने के कारण इसका जल रसायनिक तत्वों से युक्त हो जाता है लिहाजा त्वचा रोगों के निवारण का कार्य भी करता है।      ऊंचाई से गिरने वाली इस जलधारा का दूधिया रंग देख कर पर्यटक मुग्ध हो जाते हैं। वस्तुत: रंध वॉटर फॉल्स भंडारडारा हिल स्टेशन का हिस्सा है लेकिन रंध वॉटर फॉल्स की खूबस...
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ताप्तापानी वॉटर फॉल्स: आैषधीय गुणों का खजाना       ताप्तापानी वॉटर फॉल्स को प्राणवायु कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, वस्तुत: इस वॉटर फॉल्स का जल आैषधीय गुणों से भरपूर है।     ओडिशा के गंजम जिला स्थित यह वॉटर फॉल्स देश दुनिया में शिखर की ख्याति रखता है। समुद्र तल से करीब 1800 फुट की ऊंचाई पर स्थित ताप्तापानी वॉटर फॉल्स क्षेत्र वस्तुत: एक सुन्दर एवं सुरम्य हिल स्टेशन है।    खास यह कि वॉटर फॉल्स का पानी रसायनिक तत्वों से भरपूर होने के साथ ही गर्म होता है। विशेषज्ञों की मानें तो ताप्तापानी के जल में काफी मात्रा में सल्फर की उपलब्धता होती है। गंजम एवं उसके आसपास का इलाका खास तौर से झरनों-झीलों के लिए प्रसिद्ध है।     विलक्षण झरनों की श्रंखला ही खास तौर से पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र हैं। बसंत ऋतु में इस इलाके में सुन्दरता के चार चांद लग जाते हैं। कारण चौतरफा सुगंध का वास होता है। ताप्तापानी वॉटर फॉल्स एवं उसके आसपास आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है।      इनमें खास तौर कंधुनी ...
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आदनपारा वॉटर फॉल्स: धरती का स्वर्ग       केरल के शाही एवं राजसी वॉटर फॉल्स की अपनी एक अलग विशिष्टता है। इन वॉटर फॉल्स को शानदार एवं सुन्दर पिकनिक स्पॉट भी कहा जा सकता है। इनकी सुन्दरता एवं सुरम्यता का कहीं कोई जोड़ नहीं।    सर्दी हो गर्मी या फिर बारिश का मौसम हो, वॉटर फॉल्स में मौज मस्ती का अपना एक अलग ही मजा होता है। केरल में वॉटर फॉल्स की एक सुन्दर श्रंखला है। इसमें खास तौर से आदनपारा, अरपपारा एवं अरुविकुझई वॉटर फॉल्स हैं।     आदनपारा वॉटर फॉल्स : आदनपारा वॉटर फॉल्स केरल के मलप्पुरम जिला के निलांबुर में स्थित है। यह इलाका शानदार एवं सुन्दर हरियाली के लिए खास तौर से ख्याति रखता है।     काफी ऊंचाई से गिरने वाला यह वॉटर फॉल्स जलक्रीड़ा-तैराकी के लिए सर्वथा उपयुक्त स्थान है। पानी की स्वच्छता एवं निर्मलता के साथ इसमें आैषधीय गुण भी विद्यमान हैं। विशेषज्ञों की मानें तो वॉटर फॉल्स क्षेत्र में आैषधीय तत्व से भरपूर वनस्पतियों की एक लम्बी श्रंखला है।        वनस्पतियों के आैषधीय तत्व व...
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कैलासाकोना : शीतलता का एहसास      कैलासाकोना वॉटर फॉल्स को मोती की इन्द्रधनुषी माला कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, कैलासाकोना वॉटर फॉल्स का एक-एक बूंद पानी मोती सा चमकता है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे जल मोतियों की माला प्रवाहमान हो।     आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिला के नारायणवनम मण्डल में स्थित यह वॉटर फॉल्स देश के शीर्ष वॉटर फॉल्स में एक है। कैलासाकोना को कालिया कोना भी कहा जाता है। खास तौर से इस स्थान को धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व हासिल है।     मान्यता है कि भगवान शिव एवं पार्वती जी कृपा यहां है। वॉटर फॉल्स के निकट ही भगवान शिव एवं माता पार्वती जी का भव्य दिव्य मंदिर भी है। करीब 40 फुट ऊंचाई से गिरने वाला यह झरना अद्भुत दिखता है।     खास यह है कि वर्ष पर्यंत इसका जल वेग बना रहता है। इसी के निकट कई अन्य लघु झरने हैं। पर्यटक इन झरनों में स्नान एवं जलक्रीड़ा का आनन्द उठाते हैं। कैलासासोना वॉटर फॉल्स के आसपास वनस्पतियों की प्रचुरता है।     वनस्पतियों की सुगंध एवं वॉटर फॉल्स की शीतल...
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तीरथगढ़ वॉटर फॉल्स: रमणीक स्थल     छत्तीसगढ़ का तीरथगढ़ वॉटर फॉल्स देश के शीर्ष फॉल्स में है। सुगंधित वनस्पतियों से घिरा यह वॉटर फॉल्स छत्तीसगढ़ की शान भी माना जाता है।      करीब 60 फुट ऊंचाई से गिरने वाला जल एक खास रोमांच पैदा करता है। जगदलपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर मुनगा-बहार नदी पर यह वॉटर फॉल्स स्थित है।    जगदलपुर से दक्षिण-पश्चिम दिशा में करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित यह वॉटर फॉल्स विशिष्टताओं से भरा है। करीब 168 मीटर चौड़ाई वाला यह फॉल्स एक अति सुन्दर एवं विहंगम दृश्य उत्पन्न करता है। यह एक अति मनोरम एवं रमणीक स्थल है।      फॉल्स का जल नीचे आकर एक जलधारा में परिवर्तित होकर 20 मीटर गहरे कुण्ड में गिरता है। गजब की सुन्दरता वाला तीरथगढ़ वॉटर फॉल्स धार्मिक स्थान की भी मान्यता रखता है। सुगंधित मूल्यवान वनस्पतियां पर्यटकों को एक ताजगी से भर देती हैं।      भगवान शिव एवं पार्वती जी के मंदिर एवं मनोहर दृश्य पर्यटकों-सैलानियों को बरबस आकर्षित करते हैं। इस क्षेत्र में वॉटर फॉल्स की एक लम्बी श्रंखला है। तीरथगढ़...
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चित्रकोट वॉटर फॉल्स: इन्द्रधनुषी छटा       छत्तीसगढ़ के चित्रकोट वॉटर फॉल्स की सुन्दरता का कोई जोड़ नहीं। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला स्थित चित्रकोट वॉटर फॉल्स को देखने एवं जलक्रीड़ा का आनन्द लेने देश-दुनिया के पर्यटक आते हैं।     घोड़े की नाल के आकार का यह वॉटर फॉल्स बस्तर में जगदलपुर से करीब 39 किलोमीटर दूर है। करीब 100 फुट ऊंचाई से गिरने वाले इस वॉटर फॉल्स की छटा इन्द्रधनुषी है।      करीब 100 फुट शीर्ष से नीचे गिरने वाले इस फॉल्स की गर्जना बेहद रोमांचक होती है। छत्तीसगढ़ का यह एक अति सुन्दर पिकनिक स्पॉट है। इसकी चौड़ाई एवं व्यापकता देखते ही बनती है।     इसकी चौड़ाई करीब 300 मीटर है। चित्रकोट वॉटर फॉल्स को देश का नियाग्रा फॉल्स भी कहा जाता है। इस वॉटर फॉल्स का उद्भव इन्द्रावती नदी से है। इन्द्रावती नदी ओडिशा के कालीहांडी से प्रवाहित होकर विंध्य क्षेत्र से होते हुये जगदलपुर से गुजरती है। जुलाई से अक्टूबर की अवधि में इसका सुन्दर नजारा दिखता है।      फोटोग्राफी के लिए यह एक सुन्दर स्थान है। फॉल्स की...
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ककोलत वॉटर फॉल्स: जल का रोमांच      वॉटर फॉल्स की शीतलता एक अलग ही आनन्द प्रदान करती है। वॉटर फॉल्स में स्नान करना हो या फिर जलक्रीड़ा का लुफ्त उठाना हो खास तौर से गर्मियोें में सैर-सपाटा करना चाहिए।     बिहार के नवादा जिला स्थित ककोलत वॉटर फॉल्स को देश के चुनिंदा वॉटर फॉल्स में गिना जाता है। ककोलत वॉटर फॉल्स की सुन्दरता एवं शीतलता पर्यटकों के मन-मस्तिष्क को पुलकित एवं प्रफुल्लित कर देती है।     खूबसूरत पहाड़ी के निकट स्थित ककोलत वॉटर फॉल्स जलक्रीड़ा का एक पसंदीदा क्षेत्र है। करीब 160 फुट ऊंचाई से नीचे गिरता जल निश्चय ही एक रोमांच पैदा करता है।     ककोलत वॉटर फॉल्स पौराणिक संदर्भ से भी ताल्लुक रखता है। पौराणिक कहावत है कि त्रेता युग में एक राजा को ऋषि ने श्राप दिया था। श्राप के कारण राजा अजगर बन गया था। अजगर के रूप में राजा यहीं प्रवास करने लगा।       द्वापर युग में पाण्डव वनवास की अवधि में कुछ समय के लिए यहां आये थे। पाण्डव के आशीर्वाद से राजा को इस यातना से मुक्ति मिली थी। श्राप से मुक्त हो...